दशमलव, शून्य व स्वास्ति चिन्ह

निराकार ब्रह्म को ‘.’ से अंकित किया जाता है तो साकार ब्रह्म को ‘0’ से ।

साकार ब्रह्माण्ड के चार भागों को प्रदर्शित करने हेतु ‘0’ को सुन्दरता से विभाजित किया तो उद्भव हुआ स्वास्ति ष् का। ‘स्वास्ति’ चिन्ह है, निराकार ब्रह्म से साकार ब्रह्म की उत्पत्ति के परिचय का ।

विदेशी शून्य (साकार ब्रह्म का ज्ञान) व दशमलव (निराकार ब्रह्म के ज्ञान) से विहीन थे। सीमित संख्याओं के लिए उन्होंने 1 = I, 3 = III, 5 = V, 10 = X 100 = C 40 = cd, 900 = Cm, 1000 = m इत्यादि चिन्ह बना रखे थे जो अवैज्ञानिक, आगामी गणनाओं व निष्कर्षों हेतु अनुपयोगी थे।

अंकों का सम्पूर्ण ज्ञान अरब राष्ट्रों ( जहाँ अंकों को ‘हिन्दसां’ अर्थात ‘हिन्द से’ कहा जाता है ) से होता योरुप पहुँचा।